बीकानेर नगर निगम चुनाव 2026: टिकट के लिए घमासान, वार्ड में जनसंपर्क से पहले टिकट की दौड़ में जुटे दावेदार
बीकानेर। नगर निगम चुनाव 2026 को लेकर बीकानेर की सियासत में टिकटों की दौड़ अब तेज हो गई है। नगर निगम के 80 वार्डों में पार्षद पद के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों में टिकट हासिल करने के लिए दावेदारों की लंबी कतार नजर आ रही है। पिछले दो-तीन दिनों से दोनों पार्टियों में प्रत्येक वार्ड से टिकट के लिए बड़ी संख्या में आवेदन सामने आए हैं। कई वार्डों में तो 8 से 10 तक दावेदार टिकट की दौड़ में बताए जा रहे हैं।
फिलहाल स्थिति यह है कि जिन उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतरकर अपने वार्ड की जनता से वोट मांगने चाहिए, उनमें से बड़ी संख्या पहले पार्टी की टिकट हासिल करने के लिए पूरा जोर लगा रही है। कोई विधायक से संपर्क कर रहा है, कोई जिला अध्यक्ष के यहां पहुंच रहा है तो कोई मंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटा है। कई दावेदार टिकट के लिए जयपुर से लेकर दिल्ली तक संपर्क साधने में लगे हुए हैं।
टिकट मांगने वालों को मिल रहा आश्वासन
दिलचस्प बात यह है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के स्थानीय नेता फिलहाल किसी भी दावेदार को स्पष्ट रूप से टिकट से इनकार नहीं कर रहे हैं। टिकट मांगने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं को यह कहकर आश्वस्त किया जा रहा है कि “आपका नाम पार्टी के सामने रखा गया है, आपके लिए प्रयास करेंगे, अंतिम फैसला पार्टी के सर्वे और नेतृत्व के स्तर पर होगा।”
यही वजह है कि टिकट की उम्मीद लगाए बैठे दावेदार भी पूरी ताकत के साथ अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। हालांकि, अंतिम फैसला होने के बाद कई दावेदारों की उम्मीदों पर पानी फिरना तय माना जा रहा है।
हमारा बीकानेर के सूत्रों के अनुसार, भाजपा और कांग्रेस दोनों में टिकट वितरण को लेकर अंदरखाने मंथन तेज हो गया है और कल शाम तक पार्षद प्रत्याशियों की पहली सूची जारी होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, सूची जारी होने तक तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं मानी जा सकती।
पहले टिकट की परीक्षा, फिर जनता का फैसला
चुनावी राजनीति का मौजूदा दौर कुछ ऐसा नजर आ रहा है कि पार्षद बनने के लिए दावेदारों को पहले अपनी ही पार्टी के भीतर टिकट की परीक्षा पास करनी होगी। इसके बाद ही उन्हें वार्ड की जनता के बीच जाकर अपना जनसमर्थन साबित करने का मौका मिलेगा।
अभी कई दावेदार वार्ड में जनसंपर्क से ज्यादा पार्टी के भीतर अपनी पकड़ और संपर्कों के जरिए टिकट हासिल करने की कोशिश में जुटे हैं। दूसरी ओर, ऐसे कार्यकर्ता भी टिकट की दौड़ में हैं जो लंबे समय से वार्ड में जनता के बीच सक्रिय रहकर काम कर रहे हैं।
कई बड़े चेहरे भी मैदान में
इस बार बीकानेर के कई वार्डों को हॉट सीट के तौर पर देखा जा रहा है। इन वार्डों में टिकट किसे मिलेगी, इसे लेकर सबसे ज्यादा सस्पेंस बना हुआ है। भाजपा और कांग्रेस के कई ऐसे बड़े चेहरे भी पार्षद की टिकट के लिए दावेदारी कर रहे हैं, जो लंबे समय से पार्टी की राजनीति में सक्रिय हैं।
कुछ दावेदार तो पार्षद बनने के बाद आगे महापौर पद की राजनीति तक के समीकरणों को ध्यान में रखकर मैदान में उतरने की तैयारी में बताए जा रहे हैं।
हालांकि, पार्टी में बड़ा चेहरा होना और वार्ड में मजबूत जनाधार होना दो अलग-अलग बातें हैं। कई ऐसे नेता भी टिकट की दौड़ में हैं, जिनकी पार्टी संगठन में अच्छी पकड़ मानी जाती है, लेकिन अपने वार्ड में उनका वास्तविक जनसमर्थन कितना है, यह चुनाव में ही सामने आएगा।
बागियों का खतरा भी सामने आएगा
टिकट वितरण के बाद दोनों ही पार्टियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बगावत की हो सकती है। लंबे समय से टिकट की तैयारी कर रहे दावेदारों में से जिनको टिकट नहीं मिलेगी, उनमें से कुछ निर्दलीय मैदान में उतर सकते हैं या पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव लड़ने का फैसला कर सकते हैं।
ऐसे में टिकट की पहली सूची जारी होने के बाद बीकानेर की राजनीतिक तस्वीर और भी दिलचस्प होने वाली है। किसे पार्टी का आशीर्वाद मिलता है, कौन टिकट से चूकता है और कौन टिकट नहीं मिलने पर बगावत का रास्ता चुनता है—इस पर अब सबकी नजरें टिकी हैं।
फिलहाल भाजपा और कांग्रेस दोनों में टिकट की जंग अपने चरम पर है। असली चुनावी मुकाबला तो टिकट वितरण के बाद वार्ड की गलियों में दिखाई देगा, जहां पार्टी का टिकट मिलने के बाद उम्मीदवारों को जनता की अदालत में अपना दमखम साबित करना होगा।




















