बीकानेर। पीबीएम में सिजेरियन डिलीवरी के बाद प्रसूताओं की मौत का सिलसिला थम नहीं रहा है। इस सप्ताह दो और प्रसूताओं की मौत हो गई। अब तक छह प्रसूताओं की मौत हो चुकी है। उधर, सरकार ने प्रसूताओं की मौत को लेकर हर सप्ताह रिपोर्ट मांगी है। पीबीएम जनाना अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद देशनोक निवासी वसुंधरा ने शुक्रवार देर रात दम तोड़ दिया। प्रसूता ने पुत्र को जन्म दिया था, जो स्वस्थ बताया जाता है। प्रसूता को शुक्रवार सुबह देशनोक सीएचसी से रेफर किया गया था। लेबर रूम में नॉर्मल डिलीवरी नहीं होने पर शाम को करीब पांच बजे उसके सिजेरियन से लड़का पैदा हुआ। प्रसूता को वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया, लेकिन उसकी ब्लीडिंग नहीं रुकी।
लगभग तीन घंटे के बाद अचानक उसकी तबीयत बिगड़ने लगी तो डॉक्टरों ने दुबारा ऑपरेशन किया। प्रसूता की बच्चेदानी निकालनी पड़ी, लेकिन उसके बाद भी ब्लीडिंग नहीं रुकी। देर रात वसुंधरा की मौत हो गई। मृतका के चाचा माधोदान चारण का कहना है कि तबीयत बिगड़ने पर आधे घंटे तक डॉक्टर नहीं आई। डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस में परिवाद दिया है। इससे पूर्व 22 जुलाई को सिजेरियन डिलीवरी के बाद नाथूसर निवासी गीता की मौत हो चुकी है। मातृ मृत्यु समीक्षा के लिए गठित कमेटी की शनिवार को हुई बैठक में प्रसूता वसुंधरा की मौत का कारण अधिक रक्तस्राव होना और गीता की मृत्यु हृदय गति रुकने को माना है। कांग्रेस नेता रामनिवास कूकणा ने घटना की निंदा की है।























