बीकानेर, 17 अगस्त 2026। सोमवार को पीबीएम बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले पंद्रह सूत्री मांगों को लेकर संघर्ष समिति के संयोजक रामनिवास कूकणा के नेतृत्व में बीकानेर की जिला कचहरी पर धरना एवं प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के दौरान अतिरिक्त जिला कलेक्टर, बीकानेर शहर एवं एसपी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य के साथ हुई वार्ता में पंद्रह सूत्री मांगों में से नौ मांगों पर लिखित में सहमति बनी।
पीबीएम बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक रामनिवास कूकणा ने कहा कि बीकानेर का पीबीएम अस्पताल संभाग का सबसे बड़ा राजकीय अस्पताल है, लेकिन गत कई महीनों से अस्पताल में भर्ती मरीजों की समय पर जाँचें नहीं हो रही हैं। अस्पताल में आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता का अभाव है। चिकित्सकों द्वारा मरीजों की समुचित देखभाल नहीं की जा रही है तथा कई चिकित्सक ओपीडी समय में अस्पताल में उपलब्ध नहीं रहते। इसके अलावा अस्पताल में साफ-सफाई एवं शुद्ध पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं है और पार्किंग के नाम पर मरीजों एवं उनके परिजनों से अधिक राशि वसूले जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
उन्होंने कहा कि अस्पताल में कार्यरत सुरक्षा गार्ड, अटेंडेंट एवं लैब टेक्नीशियन का कई महीनों का वेतन भी बकाया है। इन तमाम अव्यवस्थाओं के साथ ही गत दो महीनों में कई प्रसूताओं की इलाज में लापरवाही एवं दवाइयों की गुणवत्ता के चलते कई प्रशुताओं कि मौत हुई है, जिसके आंकड़े भी अस्पताल प्रशासन छुपा रहा है ।इन सभी समस्याओं के विरोध में समिति द्वारा जिला कचहरी पर एक दिवसीय सांकेतिक धरना देकर विरोध दर्ज करवाया गया।
रामनिवास कूकणा ने कहा कि प्रशासन के साथ हुई वार्ता में पंद्रह सूत्री मांगों में से नौ मांगों पर लिखित सहमति बनी है। उन्होंने कहा कि राजस्थान की बदहाल चिकित्सा व्यवस्था एवं लगातार सामने आ रही प्रसूताओं की मौत की घटनाओं की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए राजस्थान के चिकित्सा मंत्री को तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देना चाहिए। साथ ही जिन प्रसूताओं की मृत्यु हुई है, उनके परिवारों के लिए राजस्थान सरकार द्वारा आर्थिक सहायता पैकेज की घोषणा की जानी चाहिए। उन्होंने पीबीएम अस्पताल की व्यवस्थाओं की प्रभावी निगरानी के लिए उच्च स्तर के आईएएस अधिकारी की नियुक्ति किए जाने की भी मांग की।
उन्होंने कहा कि इन तमाम समस्याओं को लेकर बीकानेर जिले के साथ-साथ पूरे बीकानेर संभाग के लोगों में रोष है। मरीजों एवं उनके परिजनों को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसी के चलते आज विरोध प्रदर्शन कर प्रशासन के साथ वार्ता की गई, जिसमें नौ मांगों पर लिखित सहमति बनी है।
रामनिवास कूकणा ने बताया कि आज से लगभग ढाई माह पूर्व पीबीएम बचाओ संघर्ष समिति का गठन किया गया था। इसके बाद से समिति लगातार पीबीएम अस्पताल में मरीजों एवं उनके परिजनों से मिलकर उनकी समस्याओं को सुन रही है। ढाई माह के दौरान समिति के सदस्यों ने हजारों मरीजों एवं उनके परिजनों से व्यक्तिगत मुलाकात कर उनकी समस्याएँ सुनीं तथा संबंधित अधिकारियों एवं जिम्मेदार व्यक्तियों से बात करके समस्याओं के समाधान का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि समिति का उद्देश्य पीबीएम अस्पताल की तमाम अव्यवस्थाओं को दूर करवाना है, ताकि मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल सके।
समिति के सदस्य हरिराम गोदारा ने कहा कि पीबीएम अस्पताल अव्यवस्थाओं का गढ़ बन चुका है। उन्होंने अस्पताल प्रशासन पर व्यवस्थाओं में लापरवाही के आरोप लगाते हुए कहा कि चिकित्सकों को अस्पताल में मरीजों की समुचित देखभाल करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते समिति की जिम्मेदारी है कि मरीजों एवं उनके परिजनों की समस्याओं को सामने लाकर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया जाए, ताकि अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार हो सके।
इस अवसर पर प्रभुदयाल सारस्वत, रामगोपाल बिश्नोई, सफी मोहम्मद, जगदीश कसवाँ, किशन सिंवर, रामदयाल गोदारा, महेन्द्र गोदारा, दिनेश कसवाँ, पंकज कसवाँ, दिनेश कूकणा, रोहित बाना, मोहित सैन, राकेश गोदारा, भगीरथ भादू, भगीरथ ज्याणी, श्रीराम भादू सहित हजारों लोग उपस्थित रहे।






















