बीकानेर। गंगाशहर के सुजानदेसर स्थित रामझरोखा कैलाशधाम में सावन माह के तृतीय सोमवार को 108 पार्थिव शिवलिंग महारुद्राभिषेक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय संत श्री सरजूदास जी महाराज के नेतृत्व में आयोजित इस 108 पार्थिव शिवलिंग महारुद्राभिषेक कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ बीकानेर से विनायक का सान्निध्य रहा। महामंडलेश्वर श्री सरजूदास जी महाराज ने बताया कि परम पूज्य गुरुदेव सियारामजी महाराज की कृपा से एवं गुरुदेव श्री रामदास जी महाराज के आशीर्वाद से आयोजित इस कार्यक्रम में 108 जोड़ों द्वारा 108 पार्थिव शिवलिंग का विधिवत् रुद्राभिषेक 11 वेदपाठी पंडितों के द्वारा सम्पन्न करवाया गया। आयोजन में पंचांगकर्ता पं. योगेश ओझा, पं. सुरेश जोशी, पं. आशीष भादाणी, पं. मोहन ओझा, पं. सोमदत्त आचार्य, पं. श्रीकृष्ण देराश्री, पं. नवरत्न देराश्री, पं. विमल ओझा, पं. मार्कण्डे ओझा, पं. राघवेंद्र ओझा, पं. अर्जुन छंगाणी, पं. केशव भादाणी, पं. रघुवीर आदि विद्वानों ने रुद्राभिषेक सम्पन्न करवाया। महारुद्राभिषेक आयोजन में आश्रम के सेवादारों एवं बीकानेर के समस्त श्रद्धालुओं की सहभागिता रही। इस दौरान रामझरोखा कैलाशधाम के पीठाधीश्वर श्री सरजूदास जी महाराज ने नशे के दुष्परिणाम बताते हुए संकल्प लिया कि प्रत्येक व्यक्ति कम से कम एक अन्य व्यक्ति जो नशे का आदी हो उसे नशे की लत छुड़ाने के लिए प्रेरित करने का कार्य करेगा। इसके साथ ही गौमाता को राष्ट्रमाता दिलाने के लिए गौसम्मान अभियान में शामिल होने का संकल्प दिलाया।
श्रद्धालुओं को मंगलवाणी प्रदान करते हुए श्री सरजूदासजी महाराज ने कहा कि शिव पुराण की मान्यता के अनुसार पार्थिव शिवलिंग पूजन से अकाल मृत्यु का भय टलता है तथा बड़े से बड़े पाप भी नष्ट हो जाते हैं। त्रेता युग में भगवान राम ने लंका विजय प्राप्ति के लिए रामेश्वरम में पार्थिव लिंग की स्थापना कर पूजन किया था। पार्थिव शिवलिंग पूजन से कालसर्प दोष, पितृ दोष, ग्रह दोष और मानसिक तनाव का असर कम होता है। घर और व्यापार में शांति, धन, अच्छा स्वास्थ्य और सफलता मिलती है।
संघ विभाग प्रमुख विनायक ने अपने उद्बोधन में कहा कि शिव ही वो गर्भ हैं जिसमें से सब कुछ जन्म लेता है और वे ही वो गुमनामी हैं, जिनमें सब कुछ फिर से समा जाता है। सब कुछ शिव से आता है, और फिर से शिव में समा जाता है। वे आदियोगी, आदिगुरू या पहले गुरु भी हैं। भगवान शिव/शंकर स्वयंभू हैं। इसलिए उन्हें शम्भू भी कहा जाता है यानि उनके माता-पिता नहीं है। ब्रह्मांड के पिता हैं, सृष्टि की उत्पत्तिकर्ता देवी पार्वती (जगत-जननी) सभी जीवित प्राणियों की माता हैं। महादेव अमर-सनातन, मृत्युंजय, कालिंजय, त्रिकालदर्शी, सर्वोच्च शक्ति, निर्माता और साथ ही सृष्टि के संहारक है।





















