बीकानेर। विशिष्ट न्यायिक मजिस्ट्रेट ललित कुमार ने चेक बाउंस के करीब 11 साल पुराने मामले में आरोपी महेंद्र कुमार धारीवाल को दोषी ठहराया है। कोर्ट ने उसे एनआई एक्ट के तहत तीन माह के कारावास और 1.90 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा नहीं करने पर आरोपी को 15 दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
मामले के अनुसार परिवादी हरिकिशन पंचारिया और आरोपी के बीच व्यापारिक संबंध एवं जान-पहचान थी। परिवादी का आरोप था कि आरोपी ने अपनी निजी जरूरतों और व्यापार बढ़ाने के लिए 95 हजार रुपये उधार लिए थे। रकम लौटाने के लिए आरोपी ने 95,000 रुपये का चेक दिया।
परिवादी ने चेक बैंक में भुगतान के लिए पेश किया, लेकिन खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण चेक बाउंस हो गया। इसके बाद परिवादी की ओर से आरोपी को कानूनी नोटिस भेजकर चेक राशि का भुगतान करने की मांग की गई, लेकिन भुगतान नहीं होने पर कोर्ट में परिवाद पेश किया गया।
आरोपी ने लगाया था चेक के दुरुपयोग का आरोप
सुनवाई के दौरान आरोपी ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि उसका परिवादी से कोई लेन-देन नहीं था। आरोपी ने दावा किया कि उसका लेन-देन सुमित कोचर से था और रकम वापस किए जाने के बाद चेक का दुरुपयोग कर उसके खिलाफ मामला दर्ज कराया गया। उसने चेक में कूटरचना किए जाने का भी आरोप लगाया।
वहीं परिवादी ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कोर्ट में मूल चेक, बैंक रिटर्न मेमो, कानूनी नोटिस और डाक संबंधी दस्तावेज पेश किए।
कोर्ट ने साक्ष्यों और दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद माना कि परिवादी यह साबित करने में सफल रहा कि आरोपी ने वैध दायित्व के भुगतान के लिए चेक जारी किया था। चेक खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण बाउंस हुआ और परिवादी ने निर्धारित अवधि में आरोपी को कानूनी नोटिस भी भेजा।
कोर्ट ने यह भी माना कि आरोपी एनआई एक्ट के तहत उसके पक्ष में बनी वैधानिक धारणा को प्रभावी ढंग से खंडित नहीं कर सका। आरोपी द्वारा चेक के दुरुपयोग और सुमित कोचर से लेन-देन का बचाव भी पर्याप्त साक्ष्य से साबित नहीं हुआ।
1.90 लाख रुपये परिवादी को मिलेंगे
कोर्ट ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए तीन माह के कारावास के साथ 1,90,000 रुपये का जुर्माना लगाया। साथ ही, जुर्माना अदा नहीं करने पर आरोपी को 15 दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। परिवादी की ओर से पैरवी अधिवक्ता शिव प्रकाश भादाणी ने की।






















