बीकानेर। नगर निगम बीकानेर में महापौर के चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। महापौर चुनने की प्रक्रिया 21 सितंबर को पूरी होनी है। चुनाव से पहले कांग्रेस और भाजपा दोनों ही अपने-अपने पार्षदों को साधने और बोर्ड बनाने की कवायद में जुटे हुए हैं। मौजूदा गणित के लिहाज से कांग्रेस के पास संख्या बल अधिक है, लेकिन चुनाव में क्रॉस वोटिंग की आशंका ने पार्टी की चिंता बढ़ा दी है। नगर निगम में भाजपा के 27 पार्षद हैं, जबकि कांग्रेस खेमे में 42 पार्षद बताए जा रहे हैं। इस लिहाज से संख्या बल के मामले में कांग्रेस आगे है। इसके बावजूद महापौर चुनाव में केवल संख्या ही निर्णायक नहीं होगी, बल्कि पार्षदों की एकजुटता भी अहम भूमिका निभाएगी। यही वजह है कि दोनों दल अपने पार्षदों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
कांग्रेस ने महापौर पद के लिए अनिल कल्ला को उम्मीदवार बनाया है। वहीं भाजपा ने डॉ. सुरेंद्र सिंह शेखावत को मैदान में उतारा है। मुकाबले के बीच कांग्रेस खेमे से ही नवरत्न डागा के नामांकन दाखिल करने से चुनावी समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। डागा के मैदान में आने से कांग्रेस के सामने एक अतिरिक्त चुनौती खड़ी हो गई है। हालांकि राजनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि डागा आज नामांकन वापस ले लेंगे अगर नाम वापिस भी ले लेते है तो भी कांग्रेस खेमे में क्रॉस वोटिंग का डर कायम है। ऐसे में कांग्रेस नेतृत्व के सामने अपने पार्षदों को एकजुट रखने की चुनौती होगी। राजनीति
दूसरी ओर, कांग्रेस खेमे में संभावित क्रॉस वोटिंग को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं हैं। यदि कांग्रेस के कुछ पार्षद पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के बजाय किसी दूसरे उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करते हैं, तो इसका सीधा असर चुनावी गणित पर पड़ सकता है। हालांकि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि कितने पार्षदों के रुख में बदलाव की संभावना है। नवरत्न डागा के नामांकन को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं हैं। कुछ लोगों का दावा है कि उनके चुनाव मैदान में उतरने के पीछे किसी प्रभावशाली नेता का समर्थन हो सकता है। हालांकि इस संबंध में किसी बड़े नेता की भूमिका की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। सूत्र बताते है कि कांग्रेस के पास अभी 35 पार्षद ही बाड़ा बंदी में है।
भाजपा के लिए भी चुनाव आसान नहीं है। संख्या बल में पीछे होने के कारण पार्टी को कांग्रेस खेमे में संभावित असंतोष या क्रॉस वोटिंग का लाभ मिलने की उम्मीद होगी। ऐसे में अगले कुछ दिन दोनों दलों के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। अब निगाहें 21 सितंबर को होने वाले मतदान पर टिकी हैं। इससे पहले नामांकन वापसी और पार्षदों की लामबंदी से तस्वीर काफी हद तक साफ हो सकती है। फिलहाल बीकानेर महापौर चुनाव में संख्या बल कांग्रेस के पक्ष में होने के बावजूद उम्मीदवारों के बीच मुकाबला और पार्षदों की निष्ठा चुनाव को रोचक बनाए हुए है।



















