बीकानेर। बीकानेर के ऑटोमेटेड मोटर ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक में वाहन श्रेणी के अनुरूप परीक्षण की समुचित व्यवस्था नहीं होने का मामला अब जनहित का मुद्दा बनता जा रहा है। विशेष रूप से पिकअप, कैंपर, टाटा ऐस एवं अन्य हल्के मालवाहक वाहनों (LMV-Transport) के ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने वाले अभ्यर्थियों को ट्रैक के निर्धारित मापदंडों एवं परीक्षण व्यवस्था के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बीकानेर सिटीजन एसोसिएशन के एडवोकेट हनुमान प्रसाद शर्मा ने कहा कि ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्टिंग प्रणाली पारदर्शिता और निष्पक्षता के उद्देश्य से लागू की गई है, लेकिन यदि ट्रैक की संरचना और परीक्षण मानक सभी वाहन श्रेणियों के लिए व्यावहारिक नहीं हैं तो इसका सीधा असर उन चालकों पर पड़ता है, जिनकी आजीविका इन्हीं वाहनों के संचालन पर निर्भर है।
उन्होंने कहा कि पिकअप, कैंपर और टाटा ऐस जैसे वाहनों की लंबाई, चौड़ाई, व्हीलबेस, टर्निंग रेडियस और संचालन की प्रकृति सामान्य कारों से अलग होती है।इसलिए इन वाहनों के लिए निर्धारित परीक्षण मापदंड एवं ट्रैक की तकनीकी संरचना भी उसी अनुरूप होनी चाहिए। यदि ऐसा नहीं है तो अभ्यर्थियों के लिए अनावश्यक कठिनाई उत्पन्न होना स्वाभाविक है।
ट्रैक उपयुक्त नहीं तो वैकल्पिक टेस्ट की व्यवस्था हो
एडवोकेट शर्मा ने मांग की कि यदि वर्तमान ऑटोमेटेड टेस्ट ट्रैक किसी विशेष वाहन श्रेणी के परीक्षण के लिए तकनीकी रूप से उपयुक्त नहीं है, तो उस श्रेणी के अभ्यर्थियों को केवल ट्रैक की सीमाओं के कारण असफल न किया जाए। जब तक उपयुक्त तकनीकी व्यवस्था नहीं होती, तब तक वैकल्पिक मैनुअल ड्राइविंग टेस्ट की व्यवस्था की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि ट्रैक का स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट कराया जाए तथा यह सार्वजनिक किया जाए कि वर्तमान ट्रैक पर किन-किन वाहन श्रेणियों के परीक्षण के लिए तकनीकी एवं प्रशासनिक स्वीकृति उपलब्ध है। साथ ही वाहन श्रेणीवार परीक्षण के निर्धारित मापदंड और प्रक्रिया भी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
मुख्यमंत्री के समक्ष उठेगा मामला
एडवोकेट हनुमान प्रसाद शर्मा ने बताया कि **आगामी 14 एवं 15 अगस्त 2026 को माननीय मुख्यमंत्री के बीकानेर आगमन के अवसर पर इस गंभीर जनहित के विषय को उनके समक्ष रखा जाएगा।** मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर ऑटोमेटेड मोटर ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक के मापदंडों एवं वर्तमान परीक्षण व्यवस्था के कारण अभ्यर्थियों को हो रही परेशानियों से अवगत कराया जाएगा। यात्राकी गाइड और यात्रा की जानकारी
ज्ञापन के माध्यम से मांग की जाएगी कि **सभी वाहन श्रेणियों के लिए वैज्ञानिक, व्यावहारिक, पारदर्शी एवं समान परीक्षण व्यवस्था सुनिश्चित की जाए**, ताकि किसी भी चालक को केवल तकनीकी व्यवस्था की कमी के कारण अपने रोजगार एवं ड्राइविंग लाइसेंस से वंचित न होना पड़े।
आरटीआई से मांगे जा रहे हैं रिकॉर्ड
इस पूरे मामले में परिवहन विभाग से आवश्यक अभिलेख एवं जानकारी प्राप्त करने के लिए **सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005** के तहत भी जानकारी मांगी जा रही है। इसमें ट्रैक की स्वीकृति, तकनीकी डिजाइन, वाहन श्रेणीवार परीक्षण मानक, संचालन व्यवस्था तथा संबंधित तकनीकी एवं प्रशासनिक दस्तावेजों की जानकारी शामिल है।
एडवोकेट शर्मा ने कहा कि **यह किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि उन हजारों चालकों और उनके परिवारों की आजीविका से जुड़ा विषय है**, जो पिकअप, कैंपर, टाटा ऐस और अन्य हल्के मालवाहक वाहनों के माध्यम से अपना रोजगार चला रहे हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि **ऑटोमेटेड टेस्टिंग प्रणाली का विरोध नहीं किया जा रहा है।** मांग केवल इतनी है कि तकनीक और व्यवस्था ऐसी हो जो प्रत्येक वाहन श्रेणी के लिए उपयुक्त हो तथा अभ्यर्थियों को समान अवसर मिले।
उन्होंने कहा कि **“परीक्षण व्यवस्था चालक की योग्यता जांचने का माध्यम होनी चाहिए, ट्रैक की तकनीकी सीमाओं के कारण चालक को परेशान करने का माध्यम नहीं।”**
उन्होंने परिवहन विभाग एवं प्रशासन से जनहित में इस मामले का शीघ्र समाधान करने की मांग की है।



















