बीकानेर। नगर निगम महापौर चुनाव को लेकर कांग्रेस में चल रही अंदरूनी खींचतान बुधवार को नामांकन के अंतिम दिन खुलकर सामने आ गई। कांग्रेस ने अनिल कल्ला को अधिकृत प्रत्याशी बनाया है, वहीं कांग्रेस के नवनिर्वाचित पार्षद नवरतन डागा ने भी महापौर पद के लिए नामांकन दाखिल कर दिया।
डागा अपने समर्थकों के साथ नामांकन दाखिल करने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने कहा कि उनका विरोध कांग्रेस पार्टी से नहीं, बल्कि पार्टी में चल रही परिवारवाद की परंपरा से है। डागा के अनुसार बार-बार एक ही परिवार को अवसर दिया जा रहा है, जबकि वर्षों से संगठन के लिए मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओं को पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहा।
डागा ने कहा कि उन्हें पता है कि चुनाव में उनकी जीत की संभावना नहीं है, लेकिन लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध दर्ज कराना उनका अधिकार और कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि हारा वही होता है जो लड़ता नहीं। उनका उद्देश्य यह संदेश देना है कि कांग्रेस का कार्यकर्ता किसी एक परिवार के पीछे चलने के लिए नहीं बना है। चुनावअपडेट्स देखें
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी की ओर से जो भी अंतिम निर्देश मिलेगा, उसका वे पालन करेंगे। उनके अनुसार महापौर पद का नामांकन दाखिल करने का उद्देश्य पार्टी को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि संगठन के भीतर कार्यकर्ताओं की आवाज उठाना है।
वार्ड 50 की जीत का भी किया जिक्र
नवरतन डागा ने अपने राजनीतिक सफर का उल्लेख करते हुए कहा कि वार्ड नंबर 50 से कांग्रेस पहले कभी चुनाव नहीं जीत सकी थी, लेकिन इस बार उन्होंने वहां से जीत दर्ज कर पार्टी की झोली में सीट डाली। इसके बावजूद मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने का अवसर नहीं मिलने की बात उन्होंने कही।
डागा ने कहा कि वे राजनीति में स्वच्छता, पारदर्शिता और सिद्धांतों के लिए आए हैं और धनबल तथा परिवारवाद के खिलाफ आवाज उठाते रहेंगे।
अनिल कल्ला कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी
गौरतलब है कि कांग्रेस ने महापौर पद के लिए अनिल कल्ला को अपना अधिकृत प्रत्याशी बनाया है। ऐसे में नवरतन डागा का नामांकन पार्टी के लिए नई राजनीतिक स्थिति पैदा करता है।
अब निगाहें नामांकन वापसी की अंतिम तिथि पर हैं। यदि डागा नामांकन वापस लेते हैं तो मुकाबले की तस्वीर अलग होगी, जबकि मैदान में बने रहने पर कांग्रेस के सामने संगठनात्मक और राजनीतिक चुनौती बनी रह सकती है।
महापौर चुनाव में अब नामांकन वापसी और आगे की रणनीति पर सभी की नजर है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि नवरतन डागा का नामांकन आगे भी कायम रहता है या पार्टी के साथ किसी स्तर पर सहमति बनती है।




















