बीकानेर। गर्मी बढ़ते ही बीकानेर शहर और आसपास के क्षेत्रों में दर्जनों निजी स्विमिंग पूल और वाटर पार्क लोगों से गुलजार हो रहे हैं। रोजाना बड़ी संख्या में युवा, बच्चे और परिवार यहां पिकनिक और मनोरंजन के लिए पहुंच रहे हैं। लेकिन इन चमकते-दमकते स्विमिंग पूलों के पीछे कई ऐसे गंभीर सवाल छिपे हैं, जिन पर शायद ही किसी का ध्यान जा रहा हो।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इनमें से कितने स्विमिंग पूल और वाटर पार्क संबंधित विभागों की वैध अनुमति लेकर संचालित हो रहे हैं? यदि अनुमति नहीं है, तो आखिर किसकी शह पर ये धड़ल्ले से चल रहे हैं? और यदि किसी दिन यहां कोई बड़ा हादसा हो जाए, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
जानकारी के अनुसार शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में कई फार्म हाउस, रिसॉर्ट और निजी परिसरों में व्यावसायिक रूप से स्विमिंग पूल संचालित किए जा रहे हैं। लोगों से प्रवेश शुल्क लेकर खुलेआम इनका संचालन हो रहा है, लेकिन अधिकांश स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था और निर्धारित मानकों का पालन होता दिखाई नहीं देता।
सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। कई स्थानों पर न तो प्रशिक्षित लाइफगार्ड मौजूद हैं, न ही प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड) की समुचित व्यवस्था, न आपातकालीन चिकित्सा सुविधा और न ही पर्याप्त सुरक्षा उपकरण। ऐसे में यदि कोई बच्चा, युवक या अन्य व्यक्ति पानी में डूब जाए या किसी अन्य दुर्घटना का शिकार हो जाए, तो उसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी?
स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी कम चिंताजनक नहीं हैं। कई लोगों का आरोप है कि कई स्विमिंग पूलों का पानी नियमित रूप से बदला ही नहीं जाता। एक ही पानी को लंबे समय तक इस्तेमाल किया जाता है, जिससे उसमें बैक्टीरिया, फंगस और अन्य हानिकारक सूक्ष्मजीव पनपने का खतरा बढ़ जाता है। यदि ऐसा दूषित पानी नहाते समय गलती से मुंह के जरिए पेट में चला जाए, तो पेट संबंधी संक्रमण, त्वचा रोग, आंखों में संक्रमण, कान की समस्याएं और अन्य गंभीर बीमारियां होने का जोखिम बढ़ सकता है। यही कारण है कि सार्वजनिक स्विमिंग पूलों में पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच और निर्धारित मानकों का पालन बेहद आवश्यक माना जाता है।
जानकारों का कहना है कि सार्वजनिक उपयोग वाले स्विमिंग पूलों में पानी की गुणवत्ता की समय-समय पर जांच, उचित क्लोरीनेशन, साफ-सफाई और स्वच्छता के नियमों का पालन अनिवार्य होना चाहिए। यदि ऐसा नहीं किया जाता, तो यह सीधे लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई स्थानों पर बिना आवश्यक अनुमति और बिना सुरक्षा मानकों के स्विमिंग पूल संचालित किए जा रहे हैं। इसके बावजूद संबंधित विभागों की ओर से कोई व्यापक जांच अभियान या सख्त कार्रवाई नजर नहीं आ रही। यही वजह है कि ऐसे प्रतिष्ठानों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
अब सबसे बड़ा सवाल प्रशासन से है—क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है? क्या जिला प्रशासन, नगर निगम और संबंधित विभाग शहर व आसपास संचालित सभी स्विमिंग पूलों और वाटर पार्कों की अनुमति, सुरक्षा व्यवस्था और पानी की गुणवत्ता की जांच करेंगे? या फिर कार्रवाई तब होगी, जब किसी परिवार की खुशियां किसी हादसे में बदल जाएंगी?
‘हमारा बीकानेर’ जिला प्रशासन से मांग करता है कि शहर और आसपास संचालित सभी स्विमिंग पूल एवं वाटर पार्कों का विशेष अभियान चलाकर निरीक्षण कराया जाए। जिन प्रतिष्ठानों के पास वैध अनुमति नहीं है, जो सुरक्षा मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं या जहां पानी की गुणवत्ता और स्वच्छता की नियमित जांच नहीं हो रही है, उनके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए। लोगों की जान और स्वास्थ्य किसी भी व्यावसायिक लाभ से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।
जनहित में अपील: यदि आपके आसपास भी कोई ऐसा स्विमिंग पूल या वाटर पार्क संचालित हो रहा है, जहां सुरक्षा व्यवस्था नहीं है या नियमों की अनदेखी की जा रही है, तो इसकी जानकारी संबंधित प्रशासनिक विभागों तक पहुंचाएं। जागरूक नागरिक बनें, क्योंकि एक छोटी सी लापरवाही किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।


















