बीकानेर। बीकानेर रेंज पुलिस ने आमजन के गुम हुए मोबाइल फोन बरामद कर उन्हें उनके वास्तविक धारकों तक पहुंचाकर सराहनीय पहल की है। पुलिस ने पिछले एक माह में तकनीकी संसाधनों की मदद से 200 गुम मोबाइल फोन बरामद किए हैं, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 50 लाख रुपये है।
महानिरीक्षक पुलिस, बीकानेर रेंज, ओमप्रकाश आईपीएस के निर्देशन में आमजन की सहायता और उनकी खोई हुई संपत्ति सुरक्षित वापस दिलाने के लिए लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में बीकानेर रेंज साइबर एवं सोशल मीडिया सेल ने रेंज के जिला पुलिस के समन्वय, सहयोग और तकनीकी सहायता से गुम हुए मोबाइल फोन की तलाश शुरू की।
पुलिस के अनुसार बरामद किए गए मोबाइल फोन पिछले 3 दिन से लेकर करीब 4 वर्ष की अवधि में गुम हुए थे। तकनीकी प्रयासों और उपलब्ध संसाधनों की मदद से इन मोबाइल फोन को ट्रेस कर बरामद किया गया और उनके वास्तविक धारकों को सुपुर्द किया गया।
मोबाइल फोन वापस मिलने पर धारकों के चेहरे पर खुशी की मुस्कान लौट आई। लोगों ने पुलिस की तत्परता और कार्रवाई की सराहना करते हुए पुलिस टीम का आभार व्यक्त किया।
इस दौरान जिला पुलिस अधीक्षक बीकानेर मृदुल कच्छावा, पवन कुमार भदौरिया, सुखविंद्र पाल सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक तथा प्रहलाद राय, पुलिस उप अधीक्षक, लीव रिजर्व, रेंज कार्यालय बीकानेर उपस्थित रहे।
इस कार्रवाई में सहायक उप निरीक्षक विमलेश कुमार, कांस्टेबल बाबूलाल डूडी 778, रेंज कार्यालय बीकानेर, कांस्टेबल गोविंद सिंह 568, जिला बीकानेर, कांस्टेबल विनोद कुमार 1391, जिला श्रीगंगानगर, महिला कांस्टेबल रानी 445, जिला हनुमानगढ़ तथा कांस्टेबल सुनील कुमार 229, जिला चूरू की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
बीकानेर रेंज पुलिस ने आमजन से अपील की है कि मोबाइल फोन अथवा अन्य कोई सामान गुम होने पर तत्काल संबंधित पुलिस थाने में सूचना दें। पुलिस द्वारा तकनीकी संसाधनों एवं उपलब्ध माध्यमों के जरिए गुमशुदा सामान की तलाश कर उसे उसके वास्तविक धारक तक पहुंचाने का हरसंभव प्रयास किया जाता है।
पुलिस ने आमजन को नशे के खिलाफ जागरूक करते हुए कहा कि नशा सिर्फ शरीर को नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज को बर्बाद करता है। पुलिस ने लोगों से अपील की कि नशा न करें, न करने दें और न ही नशे के अवैध कारोबार को पनपने दें। आसपास नशे से जुड़ी किसी भी गतिविधि की जानकारी तत्काल पुलिस को दें।
बीकानेर रेंज पुलिस की यह पहल आमजन में विश्वास बढ़ाने और पुलिस-जन सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।






















